जहानाबाद विधानसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला: जनसुराज ने खेला भूमिहार कार्ड, आरजेडी-जेडीयू में फंसा समीकरण

Interesting contest in Jehanabad assembly seat: Jansuraj plays Bhumihar card, RJD-JDU equation stuck

पटना/जहानाबाद – बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहानाबाद सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और टक्कर का होने जा रहा है। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने यहां जातीय समीकरण साधते हुए भूमिहार समुदाय से आने वाले स्कूल संचालक अभिराम शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है।

यह फैसला न केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है, बल्कि जनसुराज की सामाजिक और रणनीतिक दिशा को भी दर्शाता है।

अब तक आरजेडी और जेडीयू की पारंपरिक जंग
जहानाबाद विधानसभा सीट बिहार की प्रमुख सीटों में गिनी जाती है और यह सामान्य (GEN) श्रेणी की सीट है। यहां अब तक मुकाबला मुख्य रूप से राजद (RJD) और जेडीयू (JDU) के बीच होता रहा है।

  • 2020 में आरजेडी के कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव ने 33,902 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
  • सुदय यादव को 47.03% (75,030 वोट) मिले थे, जबकि जेडीयू के कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा को 25.78% (41,128 वोट) ही मिल सके।
  • 2015 में भी आरजेडी के मुंद्रिका सिंह यादव ने 50.87% वोट शेयर के साथ यह सीट जीती थी।

चुनाव कार्यक्रम

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे:

  • पहला चरण: 6 नवंबर
  • दूसरा चरण: 11 नवंबर
  • मतगणना: 14 नवंबर

जहानाबाद जिले की तीनों सीटें – जहानाबाद, मखदुमपुर और घोसी – दूसरे चरण में वोटिंग करेंगी। नामांकन की प्रक्रिया 13 से 20 अक्टूबर तक चलेगी।

जनसुराज का नया दांव
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी इस चुनाव में नए प्रयोग कर रही है। पार्टी ने शिक्षित, साफ-सुथरी छवि और बौद्धिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की रणनीति अपनाई है। अभिराम शर्मा का चयन उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अगर भूमिहार समुदाय एकजुट होकर उनके समर्थन में आता है, तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।

विरोध और समीकरणों की उथल-पुथल

  • राजद से सुदय यादव फिर से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, लेकिन इस बार उन्हें अंदरूनी विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है।
  • जेडीयू से नाराज होकर घोसी के पूर्व विधायक जगदीश शर्मा के बेटे राहुल शर्मा हाल ही में राजद में शामिल हो गए हैं।
  • दूसरी ओर, पूर्व सांसद अरुण कुमार ने अपने बेटे ऋतुराज कुमार के साथ जेडीयू जॉइन कर ली है।

अगर जेडीयू ऋतुराज को टिकट देती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। वहीं अगर टिकट किसी अन्य समाज को जाता है, तो भूमिहार समुदाय की नाराजगी जनसुराज को फायदा पहुंचा सकती है।

निष्कर्ष
जहानाबाद में इस बार का चुनाव न केवल जातीय समीकरणों पर, बल्कि नई राजनीति और छवि आधारित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता पर भी निर्भर करेगा। जनसुराज के लिए यह एक परीक्षण की भूमि बन सकती है, जबकि आरजेडी और जेडीयू के लिए अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखना आसान नहीं होगा।

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